मेरी सूखी कलम को चंद बूँद स्याई उधर दी है
इक परायी फूँक ने आज मुझे उड़ान दी है
वोह जो ठहर गयी थी मासूम सी कहीं,
उस निश्चल सी सोच को ढलान दी है
इक अजनबी सी, परायी सी
फूँक ने मुझे नयी उड़ान दी है
जिस को सिमटा कर रखा था इतने वक़्त से
उस बेरंग दिल को नयी बहार दी है
किसी अनजान सी, छोटी सी नाजुक सी
परायी फूँक ने मेरे परों को नयी उड़ान दी है।
इक परायी फूँक ने आज मुझे उड़ान दी है
वोह जो ठहर गयी थी मासूम सी कहीं,
उस निश्चल सी सोच को ढलान दी है
इक अजनबी सी, परायी सी
फूँक ने मुझे नयी उड़ान दी है
जिस को सिमटा कर रखा था इतने वक़्त से
उस बेरंग दिल को नयी बहार दी है
किसी अनजान सी, छोटी सी नाजुक सी
परायी फूँक ने मेरे परों को नयी उड़ान दी है।
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