SafarNama
About Me
preeneix
View my complete profile
Wednesday, September 04, 2013
कहतें हैं खत्म हो जाता है
जलने से वजूद
जो उडती है राख स्याह
फिर वो क्या है ?
हूँ न जिंदा अब , है न शरीर
सिर्फ है बची रुह
हैरत कि जो दर्द
फिर वो क्या है ?
जला है जिस्म जहाँ, दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो राख, जुस्तजू क्या है??
~ मिर्ज़ा ग़ालिब
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)