Wednesday, September 04, 2013



कहतें हैं खत्म हो जाता है
जलने से वजूद
जो उडती है राख स्याह
फिर वो क्या है ?

हूँ न जिंदा अब , है न शरीर
सिर्फ है बची रुह
हैरत कि जो दर्द
फिर वो क्या है ?

जला है जिस्म जहाँ, दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो  राख, जुस्तजू क्या है??

                                  ~ मिर्ज़ा ग़ालिब



Monday, June 03, 2013

वो जो दिखते है अक्स
पानी की देहलीजों पर
उसमें कुछ तो मेरा अंश होगा

चाहे इस ओर या
उस और सही पर
इक नन्हा सा घर मेरा भी होगा

Tuesday, May 28, 2013



किसी एक को ज़िन्दगी का
सार बना लेना
है जख्म्दायी ...
अपना वजूद मिटा देना

न तुम्हारे जाने से जिस की
आँखें नम हो
है जख्म्दायी ...
उस एक पर हर आँसूं लुटा देना 

आज भी जिंदा है...


जला कर खत्म कर दिया
जिस माजी के पन्ने को
वो मुझ में
आज भी जिंदा है

टटोल कर खाली कर दिया
जिस ज़हन और दिल को
बीतें पलों की आहट वहां
आज भी जिंदा है

मुझ नादां ने सोचा
आ रहे कल को सुन्हेरी बनूंगी
बीते तेरी खताएं
अपनी हथेलियों से छुपाऊँगी

चुग-चुग कर उजाड़ कर दिया
जिस गुलशन को, वहाँ चुभते
तेरी मेरी गलतियों के काँटे
आज भी जिंदा है

सूख चुके खारे आँसू
दिल के हर कोने में
रख बन घोटने को
आज भी जिंदा है

कैसे कह दूँ  भूल चुकी हूँ
उस माजी की आवाज़
मेरी तन्हाइयों में वो
आज भी जिंदा है

Monday, May 27, 2013


निर्मम शिला मात्र ये न समझना मैं हूँ
एहसासों से दूर अनजान अंधेरो में गुम न समझना मैं हूँ

मेरी दुआओं में तुम शामिल अब भी
जो टूट कर बिखर जाऊं वो दयार  न समझना मैं हूँ

सुन्न

यह सूखी कलम जिससे 
कुछ रोज़ से ताल्लुक  नहीं हुआ

हो गयी है संगीत से गुम
यह कुछ रोज़ से रोई नहीं
सियाह सियाही जो बदस्तूर थी
सच के तीर चलाती

है सुन्न कुछ रोज़ से...

Friday, May 24, 2013

कल जो तेरी याद में आये
वो खारे  आंसू भी मीठे हो लिए 

तेरी कलम का हर हर्फ़ जो
मेरे जिस्म की किताब पे लिखा गया

थोडा गुदगुदा गया,
थोड़े सपने दे गया,
थोड़ी आहें दे गया,
और
एक अमित इंतज़ार दे गया ... 

Thursday, May 16, 2013

मैंने सुना कल किसी अजनबी से
कि बातें करते रहनी चाहिए
कहीं दूरियां न आ जाए रिश्तों में
फलसफे सी चाहत करते रहनी चाहिए

वो अजनबी अनजान था
तेरे मेरे रिश्ते से
एहसासों  की  इबादत है यहाँ
कैसे झूठ की ख्वाहिशें करते रहनी चाहिए

तू सच जान, या न भी जान
मेरे होने में तेरे होने की वजह है
मेरी ख़ामोशी खलिश नहीं , ये जो
बयान न कर सके सुनते रहनी चाहिए

और गर ख़त्म  भी हो गया यह रिश्ता
औरों के लिए
तेरे जाने में.. मेरे होने में
बीते दिनों की याद जिंदा रहनी चाहिए

A gift..

I musn't forget
You were given to me
with a reminder of not to be
oblivious of the truth of life.

You were given to me
to remember always
the reasons these transitions
happen and are rejoiced.

You were given to me
not to make something of you
but to give a meaning
to the world I called 'me'

You were given to me
and by not accepting you
I am giving away..
A gift crafted for me..