Saturday, August 02, 2014

इस बार की बारिश

इस बार की बारिश बड़ी देर से आई
इंतज़ार ज़्यादा था … उम्र कुछ कम
पानी बरसा तो गज़ब , पर देरी से बरसा
जिस्म भीगे … और रूह सूखी रह गयी

इस बार की बारिश बड़ी देर से आई
उम्मीद ए चिंगारी थी … कि जलें हम
पानी बरसा, सुलगती लौ पे बरसा
एहसास जागे…और आँखें वीरान रह गयी

इस बार की बारिश बड़ी देर से आई
अकस्मात् तुम साथ चले… इतने हमारे करम?
पानी बरसा, ज़रा थम के बरसा
साँस टूटी… और मैं ज़िंदा रह गयी