काश अक्षर पसीजते,
फड़फड़ाते, तड़पते
काश सियाही बहती,
ढलती , पिघलती
दोनों मिल के
डूबते, उबरते, निचुड़ते, सूखते
फिर ...
मेरी तरह
तेरे इंतज़ार में
पत्थर पर पड़ी
लकीरें हो जाते।
फड़फड़ाते, तड़पते
काश सियाही बहती,
ढलती , पिघलती
दोनों मिल के
डूबते, उबरते, निचुड़ते, सूखते
फिर ...
मेरी तरह
तेरे इंतज़ार में
पत्थर पर पड़ी
लकीरें हो जाते।
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