Monday, May 27, 2013

सुन्न

यह सूखी कलम जिससे 
कुछ रोज़ से ताल्लुक  नहीं हुआ

हो गयी है संगीत से गुम
यह कुछ रोज़ से रोई नहीं
सियाह सियाही जो बदस्तूर थी
सच के तीर चलाती

है सुन्न कुछ रोज़ से...

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