यह सूखी कलम जिससे
कुछ रोज़ से ताल्लुक नहीं हुआ
हो गयी है संगीत से गुम
यह कुछ रोज़ से रोई नहीं
सियाह सियाही जो बदस्तूर थी
सच के तीर चलाती
है सुन्न कुछ रोज़ से...
कुछ रोज़ से ताल्लुक नहीं हुआ
हो गयी है संगीत से गुम
यह कुछ रोज़ से रोई नहीं
सियाह सियाही जो बदस्तूर थी
सच के तीर चलाती
है सुन्न कुछ रोज़ से...
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